अरे माली जगह खाली

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॥ पावन पाठ ॥

अरे माली जगह खाली,

लगा दे फूल की डाली॥

जब भंवरा आकर बैठेगा,

खुशी से वो गुनगुनाएगा,

कभी इस फूल कभी उस फूल,

वो भंवरा पंख फैलाएगा,

अरे माली......

कलियाँ जब मुँह खोलेगी,

तब माला मैं पुरोऊँगी,

गले में भगवन के,

मैं हाथों से पहनाऊँगी,

अरे माली......

सिंहासन जब लगाऊँगी,

मैं फूलों से सजाऊँगी,

चमेली गेंदा और गुलाब,

खुश्बू निराली आएगी,

अरे माली......

श्रृंगार जब करेंगे भगवन,

मैं फूलों में छिप जाऊंगी,

नजारा अपने भगवन का,

मैं फूलों से ही निहारुंगी,

अरे माली......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।