राधे गोविन्द मेरे गोकुल में आ गये

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधे गोविन्द मेरे गोकुल में आ गये,

सोये हुये भाग्य मेरे आज जगा गये॥

सुआ सुआ रंग मेरी राधा को भा गया,

मोर कण्ठ मेरे गोविन्द को छा गया,

रंग रंगीले दोनो वृंदावन वाले,

सोये हुये भाग्य मेरे आज जगा गये.......

चंदा की चांदनी है राधा मैया,

सूरज जू धमके मेरे कृष्ण कन्हैया,

जगमग जैसे हो चांद सितारे,

सोये हुये भाग्य मेरे आज जगा गये.......

दमदम दमके राधे रानी की बिंदिया,

मोर मुकुट वाले कुंवर सांवरिया,

कजरारे नैन जोड़ी राधे सांवरे,

सोये हुये भाग्य मेरे आज जगा गये.......

रूप सांवरी का दिल में समा गया,

सांवर रंग मेरे मन को चुरा गया,

मोहनी मूरत भक्तों के प्यारे,

सोये हुये भाग्य मेरे आज जगा गये.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।