गोगा जी ने लाइ समाधि

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॥ पावन पाठ ॥

झूठ मत ना बोल पियाजी,

झूठा देवे लारा सै,

बाहर निकल के देख पियाजी,

गांव या मेड़ी जा रया सै,

भादवा का यो महीना गौरी,

मेड़ी जाण का आ रह्या सै,

गोगा जी ने लाइ समाधि,

गोरख धूणा ला रह्या सै,

गोगा जी ने लाइ समाधि,

गोरख धूणा ला रह्या सै।

नवमी को दिन यो आया,

ये भगत कड़ाई ल्यावे सै,

दूर दूर तक परचे पीर के,

भगत ये दर पे जावे सै,

धुण पीर के गावै,

भगता का देखा लारा सै,

गोगा पीर ने लाइ समाधि,

गोरख धूणा ला रह्या सै।।

खेत क्यार का काम तेरा,

तू बेड़े खाद गवाई रे,

दर्शन करने मेड़ी चालूं मैं भी,

गोगा नवमी आई रै,

अपनी होवे सुनवाई,

भदधू तेरा जमीदारा सै,

गोगा जी ने ली समाधि,

गोरख धूणा ला रह्या सै।

मैं पक्का मेड़ी जाउंगी,

छोड़ घर के काम रै,

गोरख जी की रटता माला,

भगत यो लेखराम रै,

यो प्यारा लागे धाम रै,

वहां चाले खूब भंडार रै,

गोगा जी ने लाइ समाधि,

गोरख धूणा ला रह्या सै......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।