पंजाब

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

केड़ा केड़ा दुख: दसां मैं पंजाब दा,

फुल्ल मुरझायां पया है गुलाब दा

केड़ा केड़ा दुख: दसां में पंजाब दा,

फुल्ल मुरझाया पया है गुलाब दा।

सुक्ख गईयां जड़ा, मुरझाईयां टाणियां

छेत्ती कीतो, मैंत्थों दसियां नहीं जाणियाँ ,

हर पासे नशे दी हनेरी झुल्ल गई,

वड्डियां दलेरों नूँ दलेरी भुल्ल गई।

दस्स केड़ा नचुँगा खण्डे दी धार ते,

गबरु पंजाब दे, नशियाँ ने मार ते,

रंगले पंजाबी, नशियाँ ने मार ते॥

कित्थे फिरे भूल्ली वडिये पंजाबणे,

तैनू अजे आउंदे नहीं जवाक सांभणे

धुंए नाल छातीया दा दूध साड़ता,

जमणे तो पहला अद्धा पुत्त मारता॥

जमदे नूं रोगों ने लिया है घेर जी,

केड़ा लाल माई दा, बनूँगा शेर जी ॥

जहरां बीज बीज़ के, उगाईयां फसला,

फसला दी जहर ने गवाईयां नसला।

ग़ऊआ मज्जां फुल्ल कीतियां ट्रेन,

टिकिया ते गिज्ज गईयाँ दूध देन जी,

कोई ना फर्क दुध ते शराब दा,

पानी पीन जोगा भी नहीं रहिया आब दा,

चिटट्टे दा तूफान ऐना बाला हो गया,

रंगला पंजाब मेरा काला हो गया॥

गिणे चुणे रह गए, खिलाड़ी खेल दें,

इंजन जंजाल दे पंजाब मेल दे,

मुंडेया नूँ मार गईयां डोडे भुक्कियाँ,

धियाँ दे गमां दे विच मावा मुक्कियाँ,

बापूजी दे फुल्ल, छप्पड़ा ते तारते,

गबरू पंजाबी नाशियाँ ने मार ते॥

लोकी अज्ज भुल्ल गए सलीका प्यार दा,

चल पया कम यारों लूट मार दा,

भूले सतिकार बाबिया दी बाणी दा,

गीता ते श्लोका विचली कहानी दा,

लग पये शहीदा दी उड़ाउन खिल्ली जी,

कीहदा कीहदा बदलू इतिहास दिल्ली जी॥

तेरे बिना रखी ना किसे ते आस जी,

सुन ले तू बिनती गुरां दे दास दी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।