काली का रूप निराला

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

काली का रूप निराला,

जिसने मारा चंड मुंड को,

हाथ खडग है विशाला,

काली का रूप निराला........

दानव थर थर कापे मैया,

जब क्रोध में आये,

आँख में ज्वाला गले मुंड माला,

बचके कोई ना जाए,

जिसने तुझको दिल से माना,

ह्रदय में किया उजाला,

काली का रूप निराला........

संकट ने जब डाला घेरा,

तूने कदम बढ़ाया,

रक्त बीज का नाश किया,

धरती से पाप मिटाया माँ,

तूने पाप मिटाया,

तुहि चंडी तुहि दुर्गा,

तुही माँ ज्वाला,

काली का रूप निराला........

रोक ना पाया कोई तुमको तीन लोक में ऐसा,

बीच डगर सोकर शिव भोला खेल रचाया कैसा,

लक्ष्मण संवारा बीच सभा में जपता तेरी माला,

काली का रूप निराला........

काली का रूप निराला,

जिसने मारा चंड मुंड को,

हाथ खडग है विशाला,

काली का रूप निराला........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।