गोपी बन शिव आ गये

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बने रे गोपी शिव शम्भू,

बने रे गोपी शिव शम्भू,

बने रे गोपी शिव शम्भू,

बने रे गोपी शिव शम्भू,

जो श्याम ने जो श्याम ने जो श्याम ने बंसी बजायी,

तो गोपी बन शिव आ गये,

तो गोपी बन शिव आ गये,

तो गोपी बन शिव आ गये,

तो गोपी बन शिव आ गये,

वृन्दावन रास रचाई,

तो गोपी बन शिव आ गये,

तो गोपी बन शिव आ गये......

यमुना तट पे रास रचाई कृष्णा ने सबसे छुपके,

अंतर्यामी शिव ने देखा आये छुपके छुपके,

यमुना तट पे रास रचाई कृष्णा ने सबसे छुपके,

अंतर्यामी शिव ने देखा आये छुपके छुपके,

बनके गोपी हो गये शामिल ओ,

नाचे शिव जी ताता धिन्ना भावु भोर भये,

की गोपी बन शिव आ गये,

की गोपी बन शिव आ गये.......

हर गोपी तो राधा लगती सबके संग गिरधारी,

लीला देखी कृष्ण की न्यारी भूल गये त्रिपुरारी,

हर गोपी तो राधा लगती सबके संग गिरधारी,

लीला देखी कृष्ण की न्यारी भूल गये त्रिपुरारी,

कान्हा की मृदुवंशी बाजे ओ,

शिव स्वरुप में नाचे तांडव सुध बुध भूल गये,

की गोपी बन शिव आ गये,

की गोपी बन शिव आ गये,

की गोपी बन शिव आ गये,

की गोपी बन शिव आ गये,

जो श्याम ने जो श्याम ने जो श्याम ने बंसी बजायी,

तो गोपी बन शिव आ गये,

तो गोपी बन शिव आ गये,

तो गोपी बन शिव आ गये,

तो गोपी बन शिव आ गये,

वृन्दावन रास रचाई,

तो गोपी बन शिव आ गये,

तो गोपी बन शिव आ गये.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।