महाकाल को मनायेगे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

महांकाल को मनायेगे, भोलेनाथ को मनायेगे ,

महांकाल को मनायेगे, भोलेनाथ को मनायेगे ,

झूमो नाचों आओ, मिल गाओ रे भक्तो,

महिमा हम तो उनकी गायेगे , भोलेनाथ को मनायेगे,

महांकाल को मनायेगे, भोलेनाथ को मनायेगे………..

मस्तक पर चंदा उनके हें साजे, उनके है साजे, उनके है साजे ,

गले में सर्पो की माला विराजे, माला बिराजे, माला बिराजे ,

जटाओ से गंगा बहती है कल-कल,

देवपित्रो को मुक्त करती है हर-पल ,

ऐसे भोले को मनायेगे, महांकाल को मनायेगे,

महांकाल को मनायेगे, भोलेनाथ को मनायेगे……………

कैलाश पर्वत पर बैठे हें भोले, बैठे है भोले, बैठे है भोले ,

मृगो की छाला को, रहते है ओढ़े, रहते है ओढ़े, रहते है ओढ़े…………

तन पर भस्मी रमाये हुए है,

ध्यान मुद्रा वो लगाये हुए है ,

गुण उनके हम तो गायेगे, भोलेनाथ को मनायेगे,

महांकाल को मनायेगे, भोलेनाथ को मनायेगे………….

उज्जैयनी में रहते, बाबा महांकाल, मेरे महांकाल, बाबा महांकाल ,

माता शक्ति संग भैरव उनके साथ, शक्ति भी साथ, भैरव भी साथ,

नर नारी, जो कोई आये यहाँ पर ,

मन इच्छा पूरी हो जाये यहाँ पर,

सत्य कहे शिव को ध्यायेगे, भोलेनाथ को मनायेगे,

महांकाल को मनायेगे, भोलेनाथ को मनायेगे…………..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।