है बीच भँवर में नैया बेड़ा पार कीजिए

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

जागो बजरंगी, अब हम पर उपकार कीजिए,

है बीच भँवर में नैया बेड़ा पार कीजिए,

है बीच भँवर में नैया बेड़ा पार कीजिए।

सुग्रीव ने आज्ञा कर दी,

जाकर सिया ख़ोज के लाना,

बिन खोज ख़बर यदि आए,

मत हमको मुँह दिखलाना,

बिन खोज गति क्या होगी,

सुन विचार कीजिए,

है बीच भँवर में नैया बेड़ा पार कीजिए,

है बीच भँवर में नैया बेड़ा पार कीजिए.......

सब हार गया था कपि दल,

छाई है निराशा भारी,

अब लाज बचाओ हनुमत,

इक आशा है तुम्हारी,

बन दीनदयाल हम पर,

दया अपार कीजिए,

है बीच भँवर में नैया बेड़ा पार कीजिए,

है बीच भँवर में नैया बेड़ा पार कीजिए......

क्या सोच रहे हो मन में,

शक्ति बड़ी है तेरे तन में,

अब राम सुमिर कर उठो वीर,

शक्ति है बड़ी सुमिरण में,

दुष्टों का कलेजा काँपे,

वो हुँकार कीजिए,

है बीच भँवर में नैया बेड़ा पार कीजिए,

है बीच भँवर में नैया बेड़ा पार कीजिए.....

सुन जामवंत की बातें,

बजरंगी हृदय समाई,

कर राम नाम का सुमिरण,

इक अद्भुद शक्ति आई,

अब राम काज हित जाओ,

सागर पार कीजिए,

है बीच भँवर में नैया बेड़ा पार कीजिए,

है बीच भँवर में नैया बेड़ा पार कीजिए......

चल पड़े सिया सुध लाने,

कपि दल में खुशियां छाई,

मातृदत्त श्याम सुन्दर मिलकर,

बजरंग की महिमा गाई,

भक्तों में भक्त शिरोमणि का,

जय जय कार कीजिए,

है बीच भँवर में नैया बेड़ा पार कीजिए,

है बीच भँवर में नैया बेड़ा पार कीजिए।

जागो बजरंगी, अब हम पर, उपकार कीजिए,

है पड़ी भँवर में नैया बेड़ा पार कीजिए,

है पड़ी भँवर में नैया बेड़ा पार कीजिए......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।