तुम शरणाई आया ठाकुर

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तुम शरणाई आया ठाकुर,

तुम शरणाई आया,

उतर गयो मेरे मन का शंसा,

जब ते दर्शन पाया,

तुम शरणाई आया ठाकुर,

तुम शरणाई आया।।

अनबोलत मेरी बिरथा जानी,

अनबोलत मेरी बिरथा जानी,

अपना नाम जपाया, ठाकुर,

तुम शरणाई आया,

तुम शरणाई आया ठाकुर,

तुम शरणाई आया।।

दुःख नाटे सुख सहज समाए,

आनंद आनंद गुण गाया, ठाकुर,

तुम शरणाई आया,

तुम शरणाई आया ठाकुर,

तुम शरणाई आया।।

बाँह पकड़ कढ़ लीन्हे अपने,

गृह अंध कूप ते माया, ठाकुर,

तुम शरणाई आया,

तुम शरणाई आया ठाकुर,

तुम शरणाई आया।।

कहो नानक गुरु बंधन काटे,

कहो नानक गुरु बंधन काटे,

बिछुरत आन मिलाया, ठाकुर,

तुम शरणाई आया,

तुम शरणाई आया ठाकुर,

तुम शरणाई आया।

उतर गयो मेरे मन का शंसा,

जब ते दर्शन पाया,

तुम शरणाई आया ठाकुर,

तुम शरणाई आया........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।