इलाही नाम का सौदा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

इलाही नाम का ये सौदा कमाले,

जिस का जी चाहे,

कमा ले जिसका जी चाहे,

कमा ले जिसका जी चाहे,

इलाही नाम का सौदा कमाले,

जिस का जी चाहे,

इलाही नाम का सौदा कमाले,

कमा ले जिसका जी चाहे......

देख कर दुनियां का धंधा,

तेरा दिल हो रहा है गन्दा,

लगा हरी नाम का साबुन,

धुला ले जिसका जी चाहे,

इलाही नाम का सौदा कमाले,

जिस का जी चाहे......

होवे जब पाक दिल तेरा,

मिले कोई सतगुरु तुझे रजवा,

रंगे फिर आप रंग तुझको,

रंगा ले जिसका जी चाहे,

इलाही नाम का सौदा कमाले,

जिस का जी चाहे.......

चढ़े जब ज्ञान रंग पक्का,

ना जा फिर द्वारका मक्का,

है दिल में दिलबर का दर्शन,

करा ले जिसका जी चाहे,

इलाही नाम का सौदा कमाले,

जिस का जी चाहे.......

लखो सब घट घट में वो ही,

तेरा ही निज रुप है सोही,

अचलराम दुई का है पर्दा,

हटा ले जिसका जी चाहे,

इलाही नाम का सौदा कमाले,

जिस का जी चाहे.......

इलाही नाम का ये सौदा कमाले,

जिस का जी चाहे,

कमा ले जिसका जी चाहे,

कमा ले जिसका जी चाहे,

इलाही नाम का सौदा कमाले,

जिस का जी चाहे.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।