मेरे मन वीणा के तार जपें

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे मन वीणा के तार जपें,

जय जय भोले भंडारी प्रभु,

अब कर दो कृपा हे शिव शंकर,

हम आये शरण तिहारी प्रभु,

मेरे मन वीणा.....

भाये डम डम डम तेरा डमरू,

चारों दिशा में तू मेरे ह्रदये में तू,

अपने भक्तों में कर डालो,

अब तो गिनती तुम हमारी प्रभु॥

मेरे मन वीणा.....

तुम हो नाथों के नाथ प्रभु,

मिलता रहे तेरा साथ प्रभु,

मुझको भी उबारो हे भोले,

तारी है सृष्टि सारी प्रभु॥

मेरे मन वीणा.....

तेरी जटा में गंगा का पानी,

पानी मे शक्ति है रूहानी,

जय जय गंगे हर हर गंगे,

जपते है सब नर नारी प्रभु॥

मेरे मन वीणा.....

कर में त्रिशूल गले सर्प माला,

है रूप तेरा भोला भाला,

तेरे शीश का चन्दा हर लेता,

हर मन की पीड़ा सारी प्रभु॥

मेरे मन वीणा.....

तेरे दर के सिवा कुछ ना सूझे,

कहता है "श्याम" अपना लो मुझे,

सुखों का सवेरा बख्शो करो,

दूर रात गमों की अंधयारी प्रभु॥

मेरे मन वीणा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।