लगन आई हरे हरे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

लगन आई हरे हरे,

लगन आई मेरे अँगना,

भोले बाबा फूले ना समाये॥

नंदी सज गए श्रृंगी सज गए,

सज गई सगरी सारी बारात,

भोले बाबा ऐसे सज गये, तीन लोक में नायें,

लगन आई हरे हरे,

लगन आई मेरे अँगना,

भोले बाबा फूले ना समाये॥

ब्रह्मा सज गये विष्णु सज गये,

सज गई सगरी बारात,

नारायण तो ऐसे सज गये, हीरा सो मुकुट सजाये,

लगन आई हरे हरे,

लगन आई मेरे अँगना,

भोले बाबा फूले ना समाये॥

भूत पिसाच ऐसे नाचे, कर सोलह श्रृंगार,

संत भक्त सब जय जय बोले, गूंज उठा कैलाश,

लगन आई हरे हरे,

लगन आई मेरे अँगना,

भोले बाबा फूले ना समाये......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।