बालाजी के दर के जैसा दूसरा कोई दर नहीं

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

बालाजी के दर के जैसा दूसरा कोई दर नहीं

बालाजी के दर के जैसा दूसरा कोई दर नहीं।।

राम के रंग में रंगे है राम हिर्दय में बसे,

राम साँसों में बसे है दूसरा कोई दर नहीं,

बालाजी के दर के जैसा दूसरा कोई दर नहीं

बालाजी के दर के जैसा दूसरा कोई दर नहीं।।

दुष्ट रावण को हराया सोने की लंका जलाई,

लंका को कर राख डाला दूसरा कोई दर नहीं,

बालाजी के दर के जैसा दूसरा कोई दर नहीं,

बालाजी के दर के जैसा दूसरा कोई दर नहीं।।

कष्ट भक्तो के मिटाते खुशियों से झोली भरे,

तेरे दर पे वो उजाला दूसरा कोई दर नहीं,

बालाजी के दर के जैसा दूसरा कोई दर नहीं

बालाजी के दर के जैसा दूसरा कोई दर नहीं।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।