शेर पे हो के सवार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेर पे हो के सवार, मैया जी मेरे घर आना,

जग की पालनहार, दादी माँ मेरे घर आना,

मैया जी मेरे घर आना, दादी माँ मेरे घर आना,

जग की पालनहार, दादी माँ मेरे घर आना,

मैया जी मेरे घर आना, दादी माँ मेरे घर आना,

शेर पे हो के सवार, मैया जी मेरे घर आना..........

त्रिकुट पर्वत बसी भवानी, त्रिकुट पर्वत बसी भवानी,

ज्वाला जल रही ज्योत नूरानी, ज्वाला जल रही ज्योत नूरानी,

वहाँ बहती जल की धार, मैया जी मेरे घर आना,

शेर पे हो के सवार, मैया जी मेरे घर आना..........

हाथीमत्था कठिन चढ़ाई, हाथीमत्था कठिन चढ़ाई,

देती सहारा खुद महामाई, देती सहारा खुद महामाई,

चहुँ और मची जय जयकार, मैया जी मेरे घर आना,

शेर पे हो के सवार, मैया जी मेरे घर आना.........

लांगुर वीर करे अगुवानी, लांगुर वीर करे अगुवानी,

ठुमक ठुमक फिर चले महारानी, ठुमक ठुमक फिर चले महारानी,

नागर की दरकार, मैया जी मेरे घर आना,

शेर पे हो के सवार, मैया जी मेरे घर आना,

जग की पालनहार, दादी माँ मेरे घर आना,

मैया जी मेरे घर आना, दादी माँ मेरे घर आना,

जग की पालनहार, दादी माँ मेरे घर आना,

मैया जी मेरे घर आना, दादी माँ मेरे घर आना,

शेर पे हो के सवार, मैया जी मेरे घर आना…………

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।