नाचे शेर माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेर, शेर, शेर नाँचे, शेर, शेर, शेर नाँचे,

क्या रंग ढंग है, दुनिया ये दंग है,

ना हार सीखी, सदा जीती जंग है,

रंगत है चाल में, खुश है हर हाल में,

डीजे धमाल में,

नाचे शेर माँ, शेर माँ, शेर माँ,

नाचे शेर माँ, शेर माँ, शेर माँ........

शामिल रहा गमपे, हर एक मोहर्रम में,

गलियों में फेरा लगाया,

और देवताओं ने दानव के गाँव में,

शक्ति के संग है पठाया,

कहती पुराण है, कहते क़ुराण है,

कहती पुराण है, कहते क़ुराण है,

ऐसा महान है,

नाचे शेर माँ, शेर माँ, शेर माँ,

नाचे शेर माँ, शेर माँ, शेर माँ.........

भोले से ब्याही, भवानी जो आयी,

तुझे साथ कैलाश लायी,

तुझे साथ कैलाश लायी,

पीरों फकीरों के संग बैठ कर शेर,

तुझको फकीरी भी भाई,

इंसा करे स्वर्ग दुनिया करे नष्ट,

इंसा करे स्वर्ग दुनिया करे नष्ट,

इससे ये अनजान है,

नाचे शेर माँ, शेर माँ, शेर माँ,

नाचे शेर माँ, शेर माँ, शेर माँ.........

माँ की सवारी, सभी तेरी न्यारी,

सदा पूजे नर और नारी,

सदा पूजे नर और नारी,

तुम पर विराजे माँ,

तुम पर ही साजे माँ,

दुनियाँ कहे शेरोवाली,

दुनियाँ कहे शेरोवाली,

दरगाह है जाता, वो दरबार आता,

दरगाह है जाता, वो दरबार आता,

किस्मत कमाल है,

नाचे शेर माँ, शेर माँ, शेर माँ,

नाचे शेर माँ, शेर माँ, शेर माँ.......

रिमझिम फुंहारों में, महकी बहारों में,

जब आये माँ के नवरात्रे,

जब आये माँ के नवरात्रे,

मैया तेरे भक्त चौकी सजा के,

माँ करवाते हैं जगराते,

माँ करवाते हैं जगराते,

ए शेर ना डर, जाती शीतल,

ए शेर ना डर, जाती शीतल,

जहाँ तेरा दर है,

नाचे शेर माँ, शेर माँ, शेर माँ,

नाचे शेर माँ, शेर माँ, शेर माँ,

शेर, शेर, शेर नाँचे, शेर, शेर, शेर नाँचे,

क्या रंग ढंग है, दुनिया ये दंग है,

ना हार सीखी, सदा जीती जंग है,

रंगत है चाल में, खुश है हर हाल में,

डीजे धमाल में,

नाचे शेर माँ, शेर माँ, शेर माँ,

नाचे शेर माँ, शेर माँ, शेर माँ........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।