शेरावाली दे दर रौनका लगियाँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

एक तेरे नाम बिना, तेरे नाम बिना,

मेनू कोण गरीब नूं जाणदा ए,

तेरा नाम लेके लंग पार जावा मेरी माँ,

मैनु आसरा तेरे नाम दा ए………….

शेरावाली दे दर रौनका ने लगिया,

मेहरावाली दे दर रौनका ने लगिया,

आओ सारे रंग बरसाइये जी,

आओ सारे रंग बरसाइये जी……………

आके जो सुनावे दुःख अपने दिल दा,

मैया दे द्वारे ता है सब कुछ मिलदा,

मैया दे द्वारे ता है सब कुछ मिलदा,

आके जो सुनावे दुःख अपने दिल दा,

मैया दे द्वारे ता है सब कुछ मिलदा,

पूरी हो गयी जो वी मुरादां मंगिया,

पूरी हो गयी जो वी मुरादां मंगिया,

आओ अज्ज नच के मनाइयाँ जी,

आओ अज्ज नच के मनाइयाँ जी,

आओ सारे रंग बरसाइये जी…………..

मैया ते द्वारे दी तां शान ही निराली ए,

जाण दे ने सारे मेरी मैया भोली भाली ए,

जाण दे ने सारे मेरी मैया भोली भाली ए,

दाती ते द्वारे दी तां शान ही निराली ए,

जाण दे ने सारे मेरी मैया भोली भाली ए,

आज मुक गईयां ‘आशु’ दी सारी तंगियाँ,

आज मुक गईयां ‘आशु’ दी सारी तंगियाँ,

आओ सारे रंग बरसाइये जी,

आओ सारे रंग बरसाइये जी…………..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।