दस वे कन्हैया चोरी किथे किथे किती आ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दस वे कन्हैया चोरी किथे किथे किती आ,

किस दे घर दा मक्खन खादा किस दे लस्सी पीती आ॥

इक सखी कहंदी मेरी उंगल मरोड़ी,

दूजी सखी कहंदी इन्हे चूड़ी मेरी चूड़ी तोड़ी,

तिज्जी सखी कहंदी मेरी चुन्नी फाड़ दित्ती आ,

दस वे कन्हैया चोरी.........

इक सखी कहंदी मेरे अंदर सी बड़या,

दुजी सखी कहंदी ओ शिक्के उत्ते चढ़या,

तीजी सखी कहंदी ओहने मटकी फोड़ दित्ती आ,

दस वे कन्हैया चोरी.........

इक सखी कहंदी मेरे घर शाम आया सी,

5-7 गोवालिया नू नाल लियाया सी,

तिज्जी सखी कहंदी ओने हद कर दित्ती आ,

दस वे कहनिया चोरी........

इक सखी कहंदी मैनु नच के दिखा दे,

दूजी सखी कहंदी मैनु बंसरी सुना दे,

इन सखियां ने मेरी मार दित्ती आ,

दस वे कहनिया चोरी........

सुन मेरी मैया चोरी मैं नहीओ किती आ,

ना मैं किसे दा मक्खन खादा,

ना मैं लस्सी पीती आ,

सुन मेरी मैया चोरी मैं नहीओ किती आ......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।