कालजो निकाल कर दिखावां कैया

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

म्हारे हिवड़े बसी है सकराय वारी मैया,

कालजो निकाल कर दिखावां कैयां,

जद भी अटका म्हारा कारज,

पार लगायी मैया,

कालजो निकाल कर दिखावां कैयां,

कालजो निकाल कर दिखावां कैयां……….

जद जद मैया जी ने याद करा हाँ,

पावाँ सागे मैया जी म्हे हरदम खड़ा हाँ,

म्हारे सर पे करे है चुनरी की छैया,

कालजो निकाल कर दिखावां कैयां,

कालजो निकाल कर दिखावां कैयां।

पग पग माँ थारो परचो मिल्यो है,

ब्रह्मणी रुद्राणी म्हाने काई को गिलो है,

जद भी आयी काली रात जोत जगाई मैया,

कालजो निकाल कर दिखावां कैयां,

कालजो निकाल कर दिखावां कैयां।

सकराय वाली मात थारी महिमा है भारी,

देवी देवता भी करे अरज तिहारी,

तू तो म्हारे पे भी मेहर बरसावे मैया,

कालजो निकाल कर दिखावां कैयां,

कालजो निकाल कर दिखावां कैयां।

जद सो मैया जी की नज़र पड़ी जी,

अटकी गाडी म्हारी चाल पड़ी जी,

संजय मन भर महिमा सुनावे मैया,

कालजो निकाल कर दिखावां कैयां,

कालजो निकाल कर दिखावां कैयां।

जद भी अटका म्हारा कारज,

पार लगायी मैया,

कालजो निकाल कर दिखावां कैयां,

कालजो निकाल कर दिखावां कैयां....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।