मुझको ये विश्वास है मैया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सारे बोलो जय माता दी,

प्रेम से बोलो जय माता दी।

मुझको ये विश्वाश है मैया, तू मेरा दुःख टालेगी,

देख मेरे आँख में आंसू, मुझको गले लगा लेगी॥

मेरी ज्योत वाली माँ, मेरी लाटां वाली माँ

मेरी शेरा वाली माँ, मेरी मेहरा वाली माँ…..

मैं क्या तुझको भेट करूँ, अब कुछ भी मेरे पास नहीं,

अपने दिल से पूछ के कह दे, क्या मैं तेरा दास नहीं,

अपने दिल से पूछ के कह दे, क्या मैं तेरा दास नहीं,

आया हूँ ये सोच के तू चरणों में मुझे बिठा लेगी,

मुझको ये विश्वाश है मैया, तू मेरा दुःख टालेगी,

देख मेरे आँख में आंसू, मुझको गले लगा लेगी……

कोई आस नहीं दुनीयाँ से, दुनिया तो बेगानी है,

दर्द ही दर्द है मेरे दिल में, और आँखों में पानी है,

दर्द ही दर्द है मेरे दिल में, और आंखों में पानी है,

सारे जग ने ठुकराया है, तू मुझको अपना लेगी,

मुझको ये विश्वाश है मैया, तू मेरा दुःख टालेगी,

देख मेरे आँख में आंसू, मुझको गले लगा लेगी……

करूँणा का सागर देखा है, मैंने तेरी निगाहों में,

चलते चलते हार गया हूँ, मैं जीवन की राहों में,

चलते चलते हार गया हूँ, मैं जीवन की राहों में,

तू ही मुझे सहारा देगी, तू ही मुझे संभालेगी,

मुझको ये विश्वाश है मैया, तू मेरा दुःख टालेगी,

देख मेरे आँख में आंसू, मुझको गले लगा लेगी,

सारे बोलो जय माता दी,

प्रेम से बोलो जय माता दी।

मुझको ये विश्वाश है मैया, तू मेरा दुःख टालेगी,

देख मेरे आँख में आंसू, मुझको गले लगा लेगी।

जय माता दी,जय माता दी,जय माता दी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।