थारी निसदिन ज्योत जगावां

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॥ पावन पाठ ॥

थारी निसदिन ज्योत जगावां हो दादा,

पित्तर महाराज।

थारी निसदिन ज्योत जगावां हो दादा,

पित्तर महाराज।

चरणा मै ध्यान लगावां हो दादा,

पित्तर महाराज,

थारी निसदिन ज्योत जगावां हो दादा,

पित्तर महाराज।।

सबसे पहले करां थारा पूजन,

सारा दिन हर्षित रहता मन,

फेर आगै कदम बढावां हो दादा,

पित्तर महाराज,

थारी निसदिन ज्योत जगावां हो दादा,

पित्तर महाराज।

चरणा मै ध्यान लगावां हो दादा,

पित्तर महाराज।।

थारी दया तै म्हारे काम समरगे,

अन धन तै भण्डारे भरगे,

हम भव सागर तर जावां हो दादा पित्तर,

पित्तर महाराज,

थारी निसदिन ज्योत जगावां हो दादा,

पित्तर महाराज।

चरणा मै ध्यान लगावां हो दादा,

पित्तर महाराज।।

बड़ी अनोखी है थारी माया,

सभ पै रखते ठण्डी छाया,

थारा पल पल शुक्र मनावां हो दादा,

पित्तर महाराज,

थारी निसदिन ज्योत जगावां हो दादा,

पित्तर महाराज।

चरणा मै ध्यान लगावां हो दादा,

पित्तर महाराज।।

धोती - कुर्ता साफा पगड़ी,

विजय दास थारा लावै जकड़ी,

हर मावस कपड़े पहनावां हो दादा पित्तर,

पित्तर महाराज,

थारी निसदिन ज्योत जगावां हो दादा,

पित्तर महाराज।

चरणा मै ध्यान लगावां हो दादा,

पित्तर महाराज।

थारी निसदिन ज्योत जगावां हो दादा,

पित्तर महाराज......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।