मेरी तुमसे डोर जुड़ गयी रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जब से श्याम दर्श मिला,

मन ये मेरा खिला खिला,

मेरी तुमसे डोर जुड़ गयी रे,

मेरी तो पतंग उड़ गई रे,

सांवरिया,

मेरी तो पतंग उड़ गई रे।

फ़ासले मिटा दो आज सारे,

हो गए जी आप तो हमारे

मन का पंछी डौल रहा,

पीहू पीहू बोल रहा,

मेरी तुमसे डोर जुड़ गयी रे,

मेरी तो पतंग उड़ गई रे,

सांवरिया,

मेरी तो पतंग उड़ गई रे।।

तुम हो जिंदगी के इक सहारे,

नहीं कोई दूजा बिन तुम्हारे,

मैंने तुझे जान लिया,

अपना तुझे मान लिया,

मेरी तुमसे डोर जुड़ गयी रे,

मेरी तो पतंग उड़ गई रे,

सांवरिया,

मेरी तो पतंग उड़ गई रे।।

तुम हो लखदातार मेरे,

तुम ही हो सरकार मेरे,

हारे के सहारे हो तुम,

नदिया के किनारे हो तुम,

मेरी तुमसे डोर जुड़ गयी रे,

मेरी तो पतंग उड़ गई रे,

सांवरिया,

मेरी तो पतंग उड़ गई रे।।

थाम लिया हाथ जब से तेरा,

हो गया आसान सफर मेरा,

खिल रही है कली कली,

नाचूं आज गली गली,

मेरी तुमसे डोर जुड़ गयी रे,

मेरी तो पतंग उड़ गई रे,

सांवरिया,

मेरी तो पतंग उड़ गई रे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।