अपनी तो पतंग उड़ गई रे

चित्र विचित्र
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

फासले मिटा दो आज सारे,

हो गए जी आप तो हमारे,

मन का पंछी डोल रहा,

संग मेरे बोल रहा,

मेरी डोर तुमसे जुड़ गई रे,

अपनी तो पतंग उड़ गई रे।

जब से तेरा दर्श मिला,

मन ये मेरा खिला खिला,

और मेरी डोर तुमसे जुड़ गई रे,

अपनी तो पतंग उड़ गई रे।।

उड़ गई, उड़ गई, उड़ गई,

अपनी तो पतंग उड़ गई रे।

फ़ासले मिटा दो आज सारे,

हो गए जी आप तो हमारे,

मन का पंछी डोल रहा,

संग मेरे बोल रहा,

मेरी डोर तुमसे जुड़ गई रे,

अपनी तो पतंग उड़ गई रे।।

जब से तेरा दर्श मिला.....

तुम हो जान तुम हो जिन्दगानी,

क्या है तेरे बिन मेरी कहानी,

मैंने तुझे जान लिया,

अपना तुझे मान लिया,

मेरी डोर तुमसे जुड़ गई रे,

अपनी तो पतंग उड़ गई रे।।

जब से तेरा दर्श मिला.....

चरणों का बनकर पुजारी,

बीते उमरियां ये सारी,

नाम तेरा जब से लिया,

जाम तेरा जब से पिया,

मेरी डोर तुमसे जुड़ गई रे,

अपनी तो पतंग उड़ गई रे।।

जब से तेरा दर्श मिला.....

आँखों में हो तेरा ही नज़ारा,

चारों तरफ दिखे श्याम प्यारा,

मधुर मधुर गान सुनूँ,

मुरली की तान सुनूँ,

क्युकी मेरी डोर तुमसे जुड़ गई रे,

अपनी तो पतंग उड़ गई रे।।

जब से तेरा दर्श मिला.....

फ़ासले मिटा दो आज सारे,

हो गए जी आप तो हमारे,

मन का पंछी डोल रहा,

संग मेरे बोल रहा,

मेरी डोर तुमसे जुड़ गई रे,

अपनी तो पतंग उड़ गई रे।।

जब से तेरा दर्श मिला,

मन ये मेरा खिला खिला,

और मेरी डोर तुमसे जुड़ गई रे,

अपनी तो पतंग उड़ गई रे।।

उड़ गई, उड़ गई, उड़ गई,

अपनी तो पतंग उड़ गई रे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।