मैया तार दे माँ हमे तार दे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेरावाली मैया तेरी सिफ़त ना लिखी जाए,

लिख लिख देखे शब्द अनको माँ तेरा मेल कोई ना खावे।

मैया तार दे तार दे तार दे माँ हमे तार दे,

मैया तार दे तार दे तार दे माँ हमे तार दे,

इतने पाप किये है जितने है अम्बर मे तारे,

अब तो सांसो की हर धड़कन मैया यही पुकारे,

मैया तार दे तार दे तार दे माँ हमे तार दे......

माना भूल गया था तुझको फस के मोह में अम्बे,

तूने भी तो याद किया ना मुझको हे जगदम्बे,

मैं ही आया तू ना आई यह कैसा है नाता,

बीच भंवर में डूब ना जाये पार लगा दे माता॥

मैया तार दे तार दे तार दे माँ हमे तार दे.......

कितने पाप गिनाऊ तुझको ऐ मेरी महामाई,

कनिका सजना नन्दा तारा, तारी मीरा भाई,

लाज बचाई ध्यानू की बनिए की नैया तारी,

मुझको भी अब तार दो अम्बे आई मेरी बारी॥

मैया तार दे तार दे तार दे माँ हमे तार दे......

धूल बनू राहों की दाती चरण तेरे लग जाऊं,

निर्मल हो जाए मैली काया और ना कुछ मैं चाहूं,

माफ करो अब अवगुण मेरे तेरी लाल कहाउँ,

मुझको ऐसा रंग दे रंग में किस दिन मैं ये चाहु॥

मैया तार दे तार दे तार दे माँ हमे तार दे......

सच्चे मन से जो दर तेरे आये भर दे उसकी झोली,

ऊंच-नीच का भेद ना जाने मैया मेरी भोली,

कल्याणी कल्याण करें माँ वरदानी वरदान दे,

आशारानी सब की आशा पल में पूरी कर दे॥

मैया तार दे तार दे तार दे माँ हमे तार दे,

मैया तार दे तार दे तार दे माँ हमे तार दे,

इतने पाप किये है जितने अम्बर मे तारे,

अब तो सांसो की हर धड़कन मैया यही पुकारे,

मैया तार दे तार दे तार दे माँ हमे तार दे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।