माँ ओ माँ तुझे ढूंढू आज कहाँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

अपने गम की दास्तां कैसे करूँ बयां,

तू सब कुछ है जानती, अंतर्यामी माँ।

माँ ओ माँ तुझे ढूंढू आज कहाँ,

माँ ओ माँ तुझे ढूंढू आज कहाँ,

पर्वत पर्वत ढूंढा मैंने,

पर्वत पर्वत ढूंढा मैंने, मिलता नही निशान,

माँ ओ माँ तुझे ढूंढू आज कहाँ

माँ ओ माँ तुझे ढूंढू आज कहाँ ॥

तूने मुझको जन्म दिया है मैं तेरी संतान हूँ,

मैं तेरी संतान हूँ, मैं तेरी संतान हूँ

तू तो है माँ बक्शनहारी मैं बेटा नादान हूँ,

मैं बेटा नादान हूँ, मैं बेटा नादान हूँ,

मेरी खुशियों की दुनिया माँ... हो माँ,

मेरी खुशियों की दुनिया माँ,

मेरी खुशियों की दुनिया माँ हो गई आज वीरान,

माँ ओ माँ तुझे ढूंढू आज कहाँ

माँ ओ माँ तुझे ढूंढू आज कहाँ ॥

नैनो में ज्योत तुम्हारी ह्रदय में तस्वीर है,

ह्रदय में तस्वीर है, ह्रदय में तस्वीर है,

मेरे हिस्से में क्यो दे दी असुवन की जागीर है,

असुवन की जागीर है, असुवन की जागीर है,

तू रूठी तो किस्मत रूठी... हो माँ,

तू रूठी तो किस्मत रूठी,

तू रूठी तो किस्मत रूठी, रुठा आज जहान,

माँ ओ माँ तुझे ढूंढू आज कहाँ

माँ ओ माँ तुझे ढूंढू आज कहाँ ॥

होठों पे है नाम तुम्हारा, दिल मे तेरी याद माँ,

दिल मे तेरी याद माँ, दिल मे तेरी याद माँ,

पता नही कब सुन पाओगी, मेरी तुम फरियाद माँ,

मेरी तुम फरियाद माँ, मेरी तुम फरियाद माँ,

दिल की दिल में रह जाये ना...हो माँ,

दिल की दिल में रह जाये ना,

दिल की दिल में रह जाये ना, दिल का ये अरमान,

माँ ओ माँ तुझे ढूंढू आज कहाँ

माँ ओ माँ तुझे ढूंढू आज कहाँ ॥

मुझमे में कोई ज्ञान नहीं है, मैं अवगुण की खान हु,

मैं अवगुण की खान हु, मैं अवगुण की खान हु,

भक्ति शक्ति नहीं है मुझमे, मैं तो इक अनजान हु,

मैं तो इक अनजान हु, मैं तो इक अनजान हु,

तेरे दर को छोड़ के मईया...हो माँ,

तेरे दर को छोड़ के मईया,

तेरे दर को छोड़ के मईया, हो जाऊ और कहाँ,

माँ ओ माँ तुझे ढूंढू आज कहाँ,

माँ ओ माँ तुझे ढूंढू आज कहाँ,

पर्वत पर्वत ढूंढा मैंने,

पर्वत पर्वत ढूंढा मैंने, मिलता नही निशान

ओ माँ ओ माँ तुझे ढूंढू आज कहाँ,

ओ माँ ओ माँ तुझे ढूंढू आज कहाँ,

तुझे ढूंढू आज कहाँ.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।