तू दयालू दीन हों

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सीता राम, सीता राम,

रे मन भज तुम सीता राम,

तू दयालू दीन हों ,तू दानी तू भिखारी,

हों प्रसिद्ध पातकी, तू पाप पुंज हारी।।

सीता राम, सीता राम,

रे मन भज तुम सीता राम।

नाथ तू अनाथ को, अनाथ कौन मो सो,

मो समान आर त नाहीं, आर ति हर तो सो।

तू दयालू दीन हों...

सीता राम, सीता राम,

रे मन भज तुम सीता राम।

ब्रम्ह तू होने जीव, तू है ठाकुर हों चेरो,

तात मात गुरु सखा, तू सब बिधि हि तू मेरो।

तू दयालू दीन हों...

सीता राम, सीता राम,

रे मन भज तुम सीता राम।

तो ही मो ही नाते अनेक, मानिये जो भावे,

ज्यों त्यों तुलसी कृपालु, चरण सरन पावे।

तू दयालू दीन हों ,तू दानी तू भिखारी,

हों प्रसिद्ध पातकी, तू पाप पुंज हारी।।

सीता राम, सीता राम,

रे मन भज तुम सीता राम।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।