एक याद तुम्हारी याद रहे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

एक याद तुम्हारी याद रहे,

और दिल में किसी की याद ना हो,

इस दिल की सुंदर नगरी में

बस और कोई आवाज ना हो

एक याद तुम्हारी याद रहे......

मेरी ये निग़ाहें तेरे ही,

दीदार की भगवन प्यासी रहें,

आ जाना देर लगाना ना,

कहीं दिल मेरा बरबाद ना हो,

एक याद तुम्हारी याद रहे......

मेरे दिल में ओ प्यारे प्रीतम,

तेरे प्रेम की हर दम ज्योति जले,

आ जाना देर लगाना ना,

कहीं दिल मेरा बरबाद ना हो,

एक याद तुम्हारी याद रहे......

एक याद तुम्हारी याद रहे,

और दिल में किसी की याद ना हो,

इस दिल की सुंदर नगरी में

बस और कोई आवाज ना हो

एक याद तुम्हारी याद रहे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।