जय जय भैरवनाथ, हर तुफां का तु किनारा हैं

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॥ पावन पाठ ॥

जय जय भैरवनाथ, हर तुफां का तु किनारा हैं,

जय जय भैरवनाथ, जय जय भैरवनाथ,

हर तुफां का तु किनारा हैं, बस तेरा ही सहारा है,

सिर पर मेरे हाथ, भैरवनाथ जी तुम्हारा है,

जय जय भैरवनाथ, हर तुफां का तु किनारा हैं ॥

नाम से तेरे, बनते काम सब मेरे, भैरु बाबा तेरी दया हैं,

जो भी मैं चाहूं, एक पल में वो पाऊं, भैरु मुझपर तेरी कृपा है ।

बिगड़ा मेरा काम, हर बिगड़ा मेरा काम, भैरु तुने ही संवारा है,

बस तेरा ही सहारा है,

जय जय भैरवनाथ, हर तुफां का तु किनारा हैं ॥

घंटियां बजती, मुरत तेरी सजती, भैरु बाबा शाम सवेरे,

तेरी ज्योति से, कुंडल के मोती से, होते है दुर अंधेरे ।

तेरे ही दम से, तेरे ही दम से तो रोशन भैरव ये जग सारा हैं,

बस तेरा ही सहारा है,

जय जय भैरवनाथ, हर तुफां का तु किनारा हैं ॥

दिल के अंदर में, इस मन के मंदिर में, भैरु बाबा तु ही बसा हैं,

बिन पिये डोलू, जय जय तेरी बोलु, छाया भक्ति का नशा हैं ।

भक्तों ने तेरे, भक्तों ने रंग में तन-मन रंग लिया सारा हैं,

बस तेरा ही सहारा है,

जय जय भैरवनाथ, हर तुफां का तु किनारा हैं ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।