तेरा दीदार क्यों नहीं होता

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरा दीदार क्यों नहीं होता,

मुझपे उपकार क्यों नहीं होता ॥

मैं गुनेहगार फिर भी तेरा हूं,

मेरा उद्धार क्यों नहीं होता,

तेरा दीदार क्यों नहीं होता,

मुझपे उपकार क्यों नहीं होता ॥

लाखों पापी तूने तार दिये,

मेरा उद्धार क्यों नहीं होता,

तेरा दीदार क्यों नहीं होता,

मुझपे उपकार क्यों नहीं होता ॥

तेरे दामन में छुप के रो लेता,

ऐसा इक बार क्यों नहीं हाता,

तेरा दीदार क्यों नहीं होता,

मुझपे उपकार क्यों नहीं होता ॥

तेरी चौखट पे जो किया मैंने,

सिजदा सविकार क्यों नहीं होता,

तेरा दीदार क्यों नहीं होता,

मुझपे उपकार क्यों नहीं होता ॥

तेरी रहमत की चार बूंदों का,

ये दास हकदार क्यों नहीं होता,

तेरा दीदार क्यों नहीं होता,

मुझपे उपकार क्यों नहीं होता ॥

तेरे पास आने को जी चाहता है,

वृन्दावन आने को दुरी मिटाने को जी चाहता है,

तेरे पास आने को जी चाहता है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।