नागेश्वर के नाथ रे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

नागेश्वर के नाथ रे, हम है तेरे दास रे,

बचपन से आउ, प्रभु भूल नही जाना रे,

पारस तेरा नाम है, जपना मेरा काम है,

बचपन से आउ, दादा भूल नही जाना रे॥

जन्म से मैने तुमको माना है,

तुम्ही हो दादा मेरे जाना है,

देखी सुहानी तेरी आंगी तो,

दिल मे तुझे ही बसाना है,

वामा मा के लाल हो, करते कमाल हो,

बचपन से आउ, दादा भूल नही जाना रे,

नागेश्वर के नाथ रे......

बनके दीवाने दादा नाचेंगे,

गुणगान तेरे प्रभु गाएंगे,

अंत समय जब आये तो,

चरणों मे तेरे ही रह जाएंगे,

मनीष की पुकार है, तू ही सरकार है,

बचपन से आउ, दादा भूल नही जाना रे,

नागेश्वर के नाथ रे, हम है तेरे दास रे,

बचपन से आउ, प्रभु भूल नही जाना रे,

पारस तेरा नाम है, जपना मेरा काम है,

बचपन से आउ, दादा भूल नही जाना रे.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।