अगर विश्व में विश्वकर्मा ना होते

लखबीर सिंह लक्खा
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॥ पावन पाठ ॥

विश्वकर्मा, विश्वकर्मा,

ये मशीने, ये पुर्जे,

ये फरमा ना होते,

अगर विश्व में,

विश्वकर्मा ना होते।।

विश्वकर्मा भगवान् की जय।

ये कल कारख़ाने,

ये मज़दूर मिलें,

ये छैनीं हथौड़े,

ये पेंच और कीलें,

ये टाटा और पेलको,

ये मज़दूर मिलें,

ये छैनीं हथौड़े,

ये अद्भुद हुनर,

कारीगर ना होते,

अगर विश्व में,

विश्वकर्मा ना होते।।

ये विज्ञान का ज्ञान,

दुनियाँ से जुड़ना,

जहाजों का उड़ना,

ईशारों से मुड़ना,

चमत्कार ये,

दुनियाँ भर में ना होते,

अगर विश्व में,

विश्वकर्मा ना होते।।

ये बिल्डिंग ये इमारत,

ये बाइक ये कारें,

नई सभ्यता के,

ये सुन्दर नजारे,

सुशोभित हमारे,

घरों में ना होते,

अगर विश्व में,

विश्वकर्मा ना होते।।

है अद्भुद बहुत,

बेधड़क इनके अंशज,

कला में निपुण,

विश्वकर्मा के वंशज,

ए लक्खा ये शर्मा,

ये वर्मा ना होते,

अगर विश्व में,

विश्वकर्मा ना होते.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।