मोहे लगन लागी कान्हा तेरे नाम की

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्री कृष्ण जय जय,

जय जय श्री कृष्णा,

राधा रमण हरी,

गोविन्द कृष्णा।।

मोहे लगन लागी बस,

कान्हा तेरे नाम की,

कान्हा तेरे नाम की,

श्याम घनश्याम की,

मुरली की धुन यूँ सुनाते ही रहना,

अपनी कृपा यूँ बनाये ही रखना,

मोहे लगन लागी बस,

कान्हाँ तेरे नाम की......

यमुना किनारे, गइयाँ चरावे,

गोपियन के संग में रास रचावे,

राधा रानी को पल पल रिझावे,

अधरन पे मीठी मुस्कान छावे,

मंद मंद मुस्कान पे जाऊं बलिहार के,

कान्हा तेरे नाम की,

श्याम घनश्याम की

मुरली की धुन यूँ, सुनाते ही रहना,

अपनी कृपा यूँ बनाये ही रखना,

श्री कृष्ण जय जय,

जय जय श्री कृष्णा,

राधा रमण हरी,

गोविन्द कृष्णा।

लोक लाज मेरा सब कुछ बिसरानी,

भक्ति में खो गयी प्रेम दीवनी,

जोगन हो गयी वो छोड़ राजधानी,

विष का प्याला पी गई अमृत समानी,

प्रेम ज्योत जली मन में जो घनश्याम की,

कान्हा तेरे नाम की श्याम घनश्याम की,

मुरली की धुन यूँ सुनाते ही रहना,

अपनी कृपा यूँ बनाये ही रखना,

श्री कृष्ण जय जय,

जय जय श्री कृष्णा,

राधा रमण हरी,

गोविन्द कृष्णा।

रज्ज वृन्दावा की मथुरा की पावन,

जो दर्श तेरा इक मन भावन,

कान्हा तेरी लगन में हम हो गए निहाल,

भक्ति में खो गया राज बेहाल,

निसदिन मैं गाउन महिमा तेरे गुणगान की,

कान्हा तेरे नाम की श्याम घनश्याम की,

मुरली की धुन यूँ सुनाते ही रहना,

अपनी कृपा यूँ बनाये ही रखना,

मोहे लगन लागी बस,

कान्हाँ तेरे नाम की,

कान्हा तेरे नाम की,

श्याम घनश्याम की,

मुरली की धुन यूँ सुनाते ही रहना,

अपनी कृपा यूँ बनाये ही रखना,

श्री कृष्ण जय जय,

जय जय श्री कृष्णा,

राधा रमण हरी,

गोविन्द कृष्णा.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।