जोड़ के हाथ झुका कर मस्तक

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जोड़ के हाथ झुका कर मस्तक,

माँगे ये वरदान हे माँ ॥

द्वेष मिटाये प्रेम बढाये नेक बने इन्सान माँ

जोड़ के हाथ झुका कर मस्तक,

माँगे ये वरदान हे माँ ॥

द्वेष मिटाये प्रेम बढाये नेक बने इन्सान माँ,

जोड़ के हाथ झुका कर मस्तक,

माँगे ये वरदान हे माँ......

भेदभाव मिटे हमारा सब को दिल में प्यार करे,

जाये नजर जिस ओर हमारी तेरा ही दीदार करे,

पल पल क्षण क्षण तेरा ही गुणगान करे,

जोड़ के हाथ झुका कर मस्तक....

दुख मे कभी दुखी ना होवे,

सुख मे सुख की चाह ना हो,

जीवन के कठिन सफर मे कांटो की परवाह ना हो,

रोक सके ना पाव हमारे विघनों के तूफान है माँ,

जोड़ के हाथ झुका कर मस्तक....

दीन दुखी ओर रोगी सबके दुखङे निसदिन दुर करे,

पोंछ के आंसू रोते नैना हसंने पर मजबूर करे,

तेरे चरणो की सेवा करते निकले तन से प्राण हे माँ,

जोड़ के हाथ झुका कर मस्तक....

तेरे ज्ञान से इस दुनिया का दूर अँधेरा करदे हम,

सत्य प्रेम के मीठे रस से सबका जीवन भरदे हम,

धीर अधीर बणजी ना सीखे ये तेरी संतान हे माँ,

जोड़ के हाथ झुका कर मस्तक,

माँगे ये वरदान हे माँ,

द्वेष मिटाये प्रेम बढाये बनेे नेक इन्सान हे माँ,

जोड़ के हाथ झुका कर मस्तक....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।