है कोई संत राम अनुरागी जाकी सुरत साहब से लागी

पारंपरिक
श्री राम भजन गुरुदेव भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

है कोई संत राम अनुरागी। जाकी सुरत साहब से लागी।

अरस परश पिवके रंग राती, होय रही पतिब्रता॥॥

दुतुयां भाव कछु नहीं समझै, ज्यों समुंद समानी सलिता॥॥

मीन जाय कर समुंद समानी, जहं देखै जहं पानी।

काल कीर का जाल न पहुंचै, निर्भय ठौर लुभानी॥॥

बांवन चंदन भौंरा पहुंचा,जहं बैठे तहं गंदा।

उड़ना छोड़ के थिर हो बैठा, निश दिन करत अनंदा॥॥

जन दरिया इक राम भजन कर, भरम बासना खोई।

पारस परस भया लोहू कंचन, बहुर न लोहा होई॥॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।