आप आया म्हारो काज सरे

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॥ पावन पाठ ॥

गाँव सुआप में जन्म लूयो हैं थे ॥

साठीका परन्या जी,

आओनी आओनी म्हारी करणी मैया,

आप आया म्हारो काज सरे ॥

पहलो पहलो पर्चो दियो पिताजी ने ॥

सर्प खाओडा जीवाया थे,

आओनी आओनी म्हारी करणी मैया,

आप आया म्हारो काज सरे ॥

बीकाजी ने वचनो दियो मा करणी ॥

गढ़ री नीम मनगाई जी,

आओनी आओनी म्हारी करणी मैया,

आप आया म्हारो काज सरे ॥

तीजो तीजो पर्चो दियो लखन जी ने ॥

सर्कस पर जीवाया जी,

आओ जी आओं जी म्हारी करणी मैया,

आप आया म्हारो काज सारे॥

भक्त थारा भजन बनावे ॥

चान्दूसिह गावे छ,

आओ जी आओं जी म्हारी करणी मैया,

आप आया म्हारो काज सरे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।