ललिता गोपी बनी सिपाही

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ललिता गोपी बनीं सिपाही,

राधे बनी कप्तान,

पकड़े गए कृष्ण भगवान॥

इस गोपी के घर में जाकर,

दही और माखन खाया चुराकर,

गोपी ने देखा जब आकर,

चोर चोर बोली चिल्लाकर,

ललिता चोर पकड़ कर लाई,

थाने के दरम्यान,

पकड़े गए कृष्ण भगवान॥

घर घर यही शिकायत आई,

ब्रज में माखन चोर कन्हाई,

चोरी करत पकड़ लिए जाई,

दिए किशोरी पास बिठाई,

मैंने चोरी कबहुँ ना कीन्ही,

दे रहे साफ बयान,

पकड़े गए कृष्ण भगवान॥

कमरबंध की परी हथकड़ी,

बंधे प्रेम बंधन में अब हरि,

नंदराय की भरी कचहरी,

लाए पकड़ श्याम को सहचरी,

दफा चार सौ सत्तावन का,

पेश किया चालान,

पकड़े गए कृष्ण भगवान॥

ग्वाल बाल ब्रज के जुरि आए,

बैरिस्टर मनसुखा बुलाए,

जो कोई इसके बंध छुड़ाए,

सौ गउन का पुण्य कमाए,

बाप है हाकिम बेटा मुजरिम,

न्याय नहीं आसान,

पकड़े गए कृष्ण भगवान॥

यशोदा जी का भोरा ढोटा,

छींका ऊंचा चोर है छोटा,

गोपियाँ का कुछ हुआ ना टोटा,

काम पुलिस का बड़ा ही खोटा,

बरी किया कह नन्द बाबा ने,

ये ब्रज का जीवन प्राण,

पकड़े गए कृष्ण भगवान॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।