सब सतियों में बड़ी सती माँ पार्वती

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

^जय जय अम्बे, जय जय अम्बे,

जय जगदम्बे, xll

सब सतियों में, बड़ी सती माँ पार्वती,

नाम अनेकों मगर, एक माँ भगवती ll

^सती अंश की, प्रचंड ज्योत से,

प्रगटी जगदम्बे ज्वाला,

जिस ने अमर, वरदान से ध्यानूं,

"भगत अमर कर डाला" l

^शक्ति सवरूपा, जगदम्बे ही,

बनी वैष्णो माता है,

श्रीधर भगत को, तार दिया जग,

"जन्म जन्म गुण गाता है" l

महाँ माया ही, मनसा देवी कहलाती,

नाम अनेकों मगर, एक माँ भगवती,,,,

सब सतियों में, बड़ी सती,,,,,,,,,,,,,,,,,,

^शुम्भ निशुम्भ का, वध करने को,

जब माता ने ठानी है,

लेकर खप्पर, खड्ग हाथ में,

"बनी कालका रानी है" l

^चंड मुंड को, मार के मईया,

चामुंडा कहलाई है,

अंत हुआ, असुरों का माँ की,

"विजय ध्वजा लहराई है" l

माँ की शक्ति से ही, समय की चले गति,

नाम अनेकों मगर, एक माँ भगवती,,,,

सब सतियों में, बड़ी सती,,,,,,,,,,,,,,,,,,

^नौं देवी की, नौं मूर्ति,

नव दुर्गा कहलाती है,

अलग अलग, पावन नामों से,

"दुनियाँ इन्हें बुलाती है" l

^जो जिस रूप में, याद करे,

माता दर्शन दिखलाती है,

अपने भक्तों, के दुःख हरती,

"जीवन सफ़ल बनाती है" l

माँ को जो भूले हो, उसकी हो दुरगति,

नाम अनेकों मगर, एक माँ भगवती,,,,

सब सतियों में, बड़ी सती,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।