मरूधर में बाबो पेहरा देवे

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

धोरा मे बाजे घोडलिये रा पोड,

मरूधर में बापजी पेहरा देवे,

भादुडे मे चढे नाचण री हिलोरी,

मरूधर में बापजी पेहरा देवे ॥

भेरुडे ने मार बापजी धरती रो पाप मिटायो,

सेठ सेठाणी रस्ते जावता चोरा आय डरायो,

पोड ऐसा बाज्या घोड़े रा भाज्या रण ने छोड़.

मरूधर में बापजी पेहरा देवे....

कर्मा रा फल बोहिते ना लाग्या,डुबत जहाज तिराई,

ले मिश्री बिणजारो आयो, मिश्री ना लूण बताई,

मिश्री रो बाबे लुण बणायो ,आयो बिणजारो दोड,

मरूधर में बापजी पेहरा देवे.....

हरी भक्ती रुपा दे किन्ही, थाली मे बाग लगायो,

हरजी भाटी महीमा जाणी, घर घर जुमलो जगायो,

डाली बाई ईकतारो बजायो, मोह माया ना छोड,

मरूधर में बापजी पेहरा देवे......

हरजी भाटी जल सेवा समिती, रामसिंग पुर वाला आवे,

खाजुवाले रे मामराज संग, सुख पल सोखल आवे,

बेगा बेगा आओ बापजी, सब भक्ता ने लोड

मरुधर में बापजी पेहरा देवे....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।