रिद्धि सिद्धि के दाता सुनो गणपति

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

सारी चिंता छोड़ दो, चिंतामण के द्वार,

बिगड़ी बनाएगा वही, विनती कर स्वीकार,

बड़े बड़े कारज सभी, पल में करे साकार,

बड़े गणपति का है साथ, साँचा ये दरबार,

सिद्ध हो हर कामना, सिद्धिविनायक धाम,

खजराना मे आन बसे मेरे, शिव गौरी के लाल।

रिद्धि सिद्धि के दाता सुनो गणपति,

आपकी मेहरबानी हमें चाहिए....-2

पहले सुमिरन करूँ गणपति आपका,

लब पे मीठी सी वाणी हमें चाहिए,

रिद्धि सिद्धि के दाता सुनो गणपति.....

सर झुकाता हूँ चरणों मे सुन लीजिये,

आज बिगड़ी हमारी बना दीजिये.....-2

ना तमन्ना है धन की ना सर ताज की,

तेरे चरणों की सेवा हमें चाहिये,

रिद्धि सिद्धि के दाता सुनो गणपति.....

तेरी भक्ति का दिल मे नशा चूर हो,

बस आँखो मे मालिक तेरा नूर हो....-2

कंठ पे शारदा माँ हमेशा रहे,

रिद्धि सिद्धि का वरदान हमें चाहिए,

रिद्धि सिद्धि के दाता सुनो गणपति.....

सारे देवों मे गुणवान दाता हो तुम,

सारे वेदों में ज्ञानों के ज्ञाता हो तुम,

ज्ञान दे दो भजन गीत गाते रहें,

बस यही ज़िन्दगानी हमें चाहिए,

रिद्धि सिद्धि के दाता सुनो गणपति,

आपकी मेहरबानी हमें चाहिए,

पहले सुमिरन करूँ गणपति आपका,

लब पे मीठी सी वाणी हमें चाहिए,

रिद्धि सिद्धि के दाता सुनो गणपति.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।