साई नाम सुमिर नित हे मनवा

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॥ पावन पाठ ॥

साई नाम सुमिर नित हे मनवा,

साई नाम सुमिर नित हे मनवा,

जीवन उपवन बन जायेगा,

बाबा की जो मर्ज़ी होगी तो,

बाबा की जो मर्ज़ी होगी तो,

जीने का मज़ा ले पायेगा,

बाबा की जो मर्ज़ी होगी तो,

जीने का मज़ा ले पायेगा....

साई नाम सुमिर नित हे मनवा,

जीवन उपवन बन जायेगा,

बाबा की जो मर्ज़ी होगी तो,

जीने का मज़ा ले पायेगा,

बाबा की जो मर्ज़ी होगी तो,

जीने का मज़ा ले पायेगा,

साई नाम सुमिर नित हे मनवा...

आंधी, तूफ़ान, बिजली, बरखा,

सब राह में तुझको रोकेंगे,

क्यों मार्ग लिया साई भक्ति का,

ज्ञानी तुझको टोकेंगे,

बढ़ता चल ना रुक इस पथ पे,

बढ़ता चल ना रुक इस पथ पे,

बाबा ही संग आएगा,

बाबा की जो मर्ज़ी होगी तो,

बाबा की जो मर्ज़ी होगी तो,

जीने का मज़ा ले पायेगा,

बाबा की जो मर्ज़ी होगी तो,

जीने का मज़ा ले पायेगा,

साई नाम सुमिर नित हे मनवा....

हर करनी तू ऐसी कर ले,

जिसमे ना तुझे पछताना पड़े,

साई भक्ति में इतना लीन हो तू,

तुझे मिलने साई को आना पड़े,

जब आयेगा मिलने तुझसे वो,

जब आयेगा मिलने तुझसे वो,

मुक्ति का संदेसा लायेगा,

बाबा की जो मर्ज़ी होगी तो,

बाबा की जो मर्ज़ी होगी तो,

जीने का मज़ा ले पायेगा,

बाबा की जो मर्ज़ी होगी तो,

जीने का मज़ा ले पायेगा,

साई नाम सुमिर नित हे मनवा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।