ऐसी लागी लगन मीरा हो गयी मगन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

है आँख वो जो श्याम का दर्शन किया करे,

है शीश जो प्रभु चरण में वंदन किया करे ।

बेकार वो मुख है जो व्यर्थ बातों में,

मुख है वो जो हरी नाम का सुमिरन किया करे ॥

हीरे मोती से नहीं शोभा है हाथ की,

है हाथ जो भगवान् का पूजन किया करे ।

मर के भी अमर नाम है उस जीव का जग में,

प्रभु प्रेम में बलिदान जो जीवन किया करे ॥

ऐसी लागी लगन, मीरा हो गयी मगन ।

वो तो गली गली हरी गुण गाने लगी ॥

महलों में पली, बन के जोगन चली ।

मीरा रानी दीवानी कहाने लगी ॥

कोई रोके नहीं, कोई टोके नहीं,

मीरा गोविन्द गोपाल गाने लगी ।

बैठी संतो के संग, रंगी मोहन के रंग,

मीरा प्रेमी प्रीतम को मनाने लगी ।

वो तो गली गली हरी गुण गाने लगी ॥

राणा ने विष दिया, मानो अमृत पिया,

मीरा सागर में सरिता समाने लगी ।

दुःख लाखों सहे, मुख से गोविन्द कहे,

मीरा गोविन्द गोपाल गाने लगी ।

वो तो गली गली हरी गुण गाने लगी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।