हे आनंदघन मंगलभवन नाथ अमंगलहारी

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

हे आनंदघन मंगलभवन नाथ अमंगलहारी,

हम आए शरण तुम्हारी

हम आए शरण तुम्हारी।।

रघुवर कृपाल प्रभु प्रनतपाल,

अब राखो लाज हमारी हम आए शरण तुम्हारी,

हे आनंदघन मंगलभवन नाथ अमंगलहारी,

हम आए शरण तुम्हारी

हम आए शरण तुम्हारी।।

तुम जैसा नहीं पतित उदाहरण पतित नहीं हम जैसा,

बिन कारण जो द्रवे दीन पर देव ना दूजा ऐसा,

हम है दीन तुम दीनबंधु तुम दाता हम है भिखारी,

श्री राम जय जय राम श्री राम जय जय राम,

श्री राम जय जय राम श्री राम जय जय राम,

हे आनंदघन मंगलभवन नाथ अमंगलहारी,

हम आए शरण तुम्हारी

हम आए शरण तुम्हारी।।

दो अक्षर का नाम है राम तुम्हारा नाम,

दो अक्षर का भाव ले तुमको करे प्रणाम।।

यही सोचकर अंतर्मन पर लिख लिया नाम तुम्हारा,

राम लिखा जिन पाषाणों पर उनको तुमने तारा,

राम से राम का नाम बड़ा है नाम की महिमा भारी,

श्री राम जय जय राम श्री राम जय जय राम,

श्री राम जय जय राम श्री राम जय जय राम,

हे आनंदघन मंगलभवन नाथ अमंगलहारी,

हम आए शरण तुम्हारी,

रघुवर कृपाल प्रभु प्रनतपाल,

अब राखो लाज हमारी हम आए शरण तुम्हारी,

हे आनंदघन मंगलभवन नाथ अमंगलहारी,

हम आए शरण तुम्हारी।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।