केवट ने कहा रघुराई से

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

केवट ने कहा रघुराई से,

उतराई ना लूंगा हे भगवन,

केवट ने कहा रघुराई से,

उतराई ना लूंगा हे भगवन,

उतराई ना लूंगा हे भगवन ॥

केवट ने कहा रघुराईं से

उतराई ना लूंगा हे भगवन......

मैं नदी नाल का सेवक हूँ,

तुम भवसागर के स्वामी हो,

मैं नदी नाल का सेवक हूँ,

तुम भवसागर के स्वामी हो,

मैं यहाँ पे पार लगाता हूँ,

तुम वहाँ पे पार लगा देना,

केवट ने कहा रघुराईं से,

उतराई ना लूंगा हे भगवन।।

तूने अहिल्या को पार लगाया है,

मुझको भी पार लगा देना,

तूने अहिल्या को पार लगाया है,

मुझको भी पार लगा देना,

मैं यहाँ पे पार लगाता हूँ,

तुम वहाँ पे पार लगा देना,

केवट ने कहा रघुराई से,

उतराई ना लूंगा हे भगवन,

केवट ने कहा रघुराई से,

उतराई ना लूंगा हे भगवन,

उतराई ना लूंगा हे भगवन ॥

केवट ने कहा रघुराईं से

उतराई ना लूंगा हे भगवन......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।