मन भजले साँवरिया

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

बीती जाए उमरिया, मन भजले साँवरिया

भजले साँवरिया तू भजले साँवरिया,

बीती जाए उमरिया, मन भजले साँवरिया।।

माया ने ऐसा भरमाया, बालापन हंस खेल गवाया,

पाके नर तन को बावरिया, मन भजले साँवरिया।।

बीती जाए उमरिया, मन भजले साँवरिया

बीती जाए उमरिया, मन भजले साँवरिया।।

गयी जवानी यूँही हाथ से, प्रेम हुआ नहीं रघुनाथ से,

अब जारी चिंता शरीरिया, मन भजले साँवरिया।।

बीती जाए उमरिया, मन भजले साँवरिया

बीती जाए उमरिया, मन भजले साँवरिया।।

देखि बुढ़ापा सब मुख मोड़े, अब भी तू नहीं जग को छोड़े,

होया मोह बजरिया, मन भजले साँवरिया।।

बीती जाए उमरिया, मन भजले साँवरिया

बीती जाए उमरिया, मन भजले साँवरिया।।

आजा सद्गुरु शरण में आजा, सिया अनुज पा राघव राजा,

फूटे पाप गगरिया, मन भजले साँवरिया।।

बीती जाए उमरिया, मन भजले साँवरिया

बीती जाए उमरिया, मन भजले साँवरिया।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।