अवधपुरी भी सज चुकी है

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

माँ कौशल्या तुझको पुकारे चले आओ अब राम हमारे,

कब तक खुद से झूठ कहूँ मैं अब ना राम से दूर रहूँ मैं,

अब ना राम से दूर रहूँ मैं राम मेरे राम राम मेरे राम।।

कब आएंगे, कब आएंगे.....

कब आएंगे पूछे व्याकुल मन मेरा सुबह शाम को,

अवधपुरी भी सज चुकी है मिलने प्रभु श्री राम को,

भोर दुपहरिया, सांझ और रतिया अंखिया तरसे राम को।।

जय सिया राम जय सिया राम जय सिया राम......

जब से जानी माँ कौशल्या राम अवध हैं आ रहे,

अखियों से खुशियों के मोती पल पल बरसे जा रहे.....-2

नित नित पूछ रही है मैया राम कहाँ तक आये हैं,

लाल से मिलने की अभिलाषा अब ना रोकी जाए हैं,

द्वार खड़ी है मैया द्वार खड़ी है द्वार खड़ी है मैया लेकर,

द्वार खड़ी है मैया लेकर ममता देखन राम को,

अवधपुरी भी सज चुकी है मिलने प्रभु श्री राम को

जय सिया राम जय सिया राम जय सिया राम......

लक्ष्मण को संदेह हुआ ना भरत के मन में पाप हो,

लेकिन हाथ जोड़ वो बोले प्रभु चलो तुम मेरे साथ हो....-2

राजा का जीवन भी देखो सेवक बन के बिताए थे,

वन से भइया के खड़ाऊ अपने साथ वो लाए थे,

भरत पुकारे हो राम हमारे...नैनों को विश्राम दो,

अवधपुरी भी सज चुकी है मिलने प्रभु श्री राम को

जय सिया राम जय सिया राम जय सिया राम......

अग्नि भी आँसू बहाए जल की बूंदें प्यासी हैं,

कब से तोहरी राह तकी अखिया बरसो से उदासी हैं.....-2

उडी धुल माटी की देखो राम कहानी गाए हैं,

घर घर खुशियों के दीपक हों भक्तों ने जलाए हैं,

अवध पधारो सियाराम हमारे....प्राणो में अब प्राण दो,

अवधपुरी भी सज चुकी है मिलने प्रभु श्री राम को

जय सिया राम जय सिया राम जय सिया राम ।।

कब आएंगे पूछे व्याकुल मन मेरा सुबह शाम को,

अवधपुरी भी सज चुकी है मिलने प्रभु श्री राम को,

भोर दुपहरिया, सांझ और रतिया अंखिया तरसे राम को।।

जय सिया राम जय सिया राम जय सिया राम......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।