भक्तों की नैया प्यारे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बीच भंवर में डोले नैया,

मांझी बनाओ कन्हैया,

कबसे रही पुकार मैं कान्हा,

विनती सुनो कन्हैया

विनती सुनो कन्हैया।

भक्तों की नैया,

प्यारे मेरे कृष्ण कन्हैया,

पार लगादे मेरे सांवरा,

भक्तों की नैया,

प्यारे मेरे कृष्ण कन्हैया,

प्यारे मेरे कृष्ण कन्हैया,

पार लगादे मेरे सांवरा,

भक्तों की नैया।

नैया हमारी मंझधार में है,

मांझी किनारा तेरे हाथ में है,

दे दो सहारा, मिल जाए किनारा,

बिगड़ी बनादे मेरे सांवरा,

भक्तों की नैया,

प्यारे मेरे कृष्ण कन्हैया,

प्यारे मेरे कृष्ण कन्हैया,

पार लगादे मेरे सांवरा,

भक्तों की नैया।

तेरा भरोसा मुझे तेरी एक आस है,

ज़िन्दगी की डोर कान्हा देख तेरे हाथ है,

अपना बना ले मुझे दर पे बुलाले,

दरस दिखा दे मेरे सांवरा,

भक्तों की नैया,

प्यारे मेरे कृष्ण कन्हैया,

प्यारे मेरे कृष्ण कन्हैया,

पार लगादे मेरे सांवरा,

भक्तों की नैया।

तेरे सिवा मेरा कौन यहा है,

मतलब से रानी कहे सारा जहां है,

दुःख दर्द मिटा दे रहमत बरसा दे,

शरण लगाले मेरे सांवरा,

भक्तों की नैया,

प्यारे मेरे कृष्ण कन्हैया,

प्यारे मेरे कृष्ण कन्हैया,

पार लगादे मेरे सांवरा,

भक्तों की नैया।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।