भस्मी रमा के

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

सावन की ये रुत सुहानी,

रिम झिम गिरता पानी,

नाच रहे हैं नंदी बाबा,

नाच रहे भोले दानी ।

सावन की ये रुत सुहानी,

रिम झिम गिरता पानी,

नाच रहे हैं नंदी बाबा,

नाच रहे भोले दानी ।

भंग चढ़ा के चिलम जला के,

नाच रहे है भोले बाबा,

भस्मी रमा के.....

भोले मेरे भोले,

तेरे बिन कुछ ना यहां,

बाबा भोले बाबा तुम जहाँ,

हम हैं वहाँ,

कालों के काल हो तुम,

तुमने विष का है प्याला पीया,

जटा शंकर कैलाशी,

घट घट में है वास तेरा,

माथे पर चन्दन,

रुद्राक्ष माला,

हाथ लिए दानी,

नाच रहे हैं धरती अम्बर,

नाच रहे भोले दानी,

सावन की ये रुत सुहानी,

रिम झिम गिरता पानी,

नाच रहे हैं नंदी बाबा,

नाच रहे भोले दानी,

भंग चढ़ा के,

चिलम जला के,

नाच रहे है भोले बाबा,

भस्मी रमा के......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।