माखन चुराता था वो अब मन चुराता है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

माखन चुराता था वो अब मन चुराता है,

हर लेता मन जिसका वो ही तर जाता है।।

जब अष्टमी की रात जग जनम मनाता है,

तब मथुरा दुल्हन सा पूरा सज जाता है,

और तन जब गोवर्धन में चलता जाता है,

मन गोकुल वृन्दावन ही घूम आता है।।

माखन चुराता था वो अब मन चुराता है,

हर लेता मन जिसका वो ही तर जाता है।।

दीखता नहीं उसको जो अकल लगता है,

उससे मन से जो ढूढ़े वो ही पाता है,

उसके लिए ही वो मुरली बजाता है,

और मोर मुकुट से ही शीश सजाता है।।

माखन चुराता था वो अब मन चुराता है,

हर लेता मन जिसका वो ही तर जाता है।।

दुनिया में तो उसका सबसे ही नाता है,

समझ में लेकिन ये मुश्किल से आता है,

मानो तो सब कुछ है मानो तो दाता है,

मानो तो पत्थर भी भगवान कहलाता है।।

माखन चुराता था वो अब मन चुराता है,

हर लेता मन जिसका वो ही तर जाता है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।