चालौ चालौ रे बुलावे राणी सती दादी

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

झुंझुनू जावेली छुक छुक रेल गाड़ी,

चालौ चालौ रे,

चालौ चालौ रे, बुलावे राणी सती दादी,

झुंझुनू जावेली छुक छुक रेल गाड़ी ॥

भादो आयो मेलो भरसी, भादो आयो मेलो भरसी,

झुंझुनू में भारी,

दादी के मंदिर में जाने की कर ल्यो सब तैयारी,

ले ल्यो, ले ल्यो रै, चुनर एक लाल सारी, महंगी सारी,

झुंझुनू जावेली छुक छुक रेल गाड़ी,

झुंझुनू जावेली छुक छुक रेल गाड़ी,

आयो रे सुनार पति से, आयो रे सुनार पति से

बोल रही है पत्नी, बोल रही है पत्नी,

आज चढाने ल्यो रे दादी जी एक सोने की नथनी,

मंगवा ल्यो रे सुनार से पूजा की थाली, सोने की थाली,

झुंझुनू जावेली छुक छुक रेल गाड़ी,

झुंझुनू जावेली छुक छुक रेल गाड़ी....

झुंझुनू जावै लोग लुगाई, झुंझुनू जावै लोग लुगाई,

जावे सुसरो सासू, जावे सुसरो सासू,

टाबर बोले म्हे भी ज्या सां,

लागे लागे रे, टाबरिया की टिकट आधी, टिकट आधी,

झुंझुनू जावेली छुक छुक रेल गाड़ी,

झुंझुनू जावेली छुक छुक रेल गाड़ी.....

साँचे मन से जाए जुगनू, साँचे मन से जाए जुगनू,

दादी ने रिझाओ, दादी ने रिझाओ,

दादी जी दातार घनेरा, मन इच्छा फल पाओ,

बोले बोले रे, राजीव आई मावस भागी,

झुंझुनू जावेली छुक छुक रेल गाड़ी,

झुंझुनू जावेली छुक छुक रेल गाड़ी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।