दिल की बात बताऊँ कइयाँ

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॥ पावन पाठ ॥

दिल की बात बताऊँ कइयाँ, माँ हो माँ,

दिल की बात बताऊँ कइयाँ, सुण म्हारी मैयां रे,

आंख्यां का आंसुड़ा मैया, थमेगा कइयाँ रे,

आंख्यां का आंसुड़ा मैया, थमेगा कइयाँ रे,

दिल की बात बताऊँ कइयाँ, दिल की बात बताऊँ कइयाँ,

सुण म्हारी मैयां रे,

आंख्यां का आंसुड़ा मैया, थमेगा कइयाँ रे,

मावड़ी, आंख्यां का आंसुड़ा मैया, थमेगा कइयाँ रे.....

जद सूं महा सूं दूर हुया हो, मनड़ो म्हारो रोवे रे,

जद सूं महा सूं दूर हुया हो, मनड़ो म्हारो रोवे रे,

थारे बिन यो म्हारी मैया, कइयां लालो सोवे रे,

कुन म्हाने लोरी गा के सुनावे, माँ......कुन म्हाने लोरी गा के सुनावे,

कुण देवे थपिया रे,

आंख्यां का आंसुड़ा मैया, थमेगा कइयाँ रे,

मावड़ी, आंख्यां का आंसुड़ा मैया, थमेगा कइयाँ रे.....

ढूंढ ढूंढ के हार गयो माँ, सूझे नहीं किनारों है,

ओड बड़े संसार के माहि, थारो एक सहारो है,

ढूंढ ढूंढ के हार गयो माँ,सूझे नहीं किनारों है,

ओड बड़े संसार के माहि, थारो एक सहारो है,

इब तो अर्जी सुण ल्यो म्हारी, माँ,

इब तो अर्जी सुण ल्यो म्हारी, पडूँ मैं पैयां रे,

आंख्यां का आंसुड़ा मैया, थमेगा कइयाँ रे,

मावड़ी, आंख्यां का आंसुड़ा मैया, थमेगा कइयाँ रे.....

गली गली में हेलो मारयो, ढूँढू सारी नगरिया रे,

गली गली में हेलो मारयो, ढूँढू सारी नगरिया रे,

डर के मारे मर ना ज्याउं ले लो मेरी खबरिया रे,

डर के मारे मर ना ज्याउं ले लो मेरी खबरिया रे,

बिन पानी के मछली तड़पे, माँ.....

बिन पानी के मछली तड़पे,

तड़पूँ जियां रे,

आंख्यां का आंसुड़ा मैया, थमेगा कइयाँ रे,

मावड़ी, आंख्यां का आंसुड़ा मैया, थमेगा कइयाँ रे.....

लाला की आवाज सुनी जब, दादी दौड़ी आई है,

लाला की आवाज सुनी जब, दादी दौड़ी आई है,

घायल की गति घायल जाने, माँ के समझ में आई रे,

घायल की गति घायल जाने, माँ के समझ में आई रे,

श्याम ने गले लगाईं मैया, माँ......

श्याम ने गले लगाईं मैया,

फैला के बैयां रे,

आंख्यां का आंसुड़ा मैया, थमेगा कइयाँ रे,

मावड़ी, आंख्यां का आंसुड़ा मैया, थमेगा कइयाँ रे.....

दिल की बात बताऊँ कइयाँ, सुण म्हारी मैयां रे,

आंख्यां का आंसुड़ा मैया, थमेगा कइयाँ रे,

आंख्यां का आंसुड़ा मैया, थमेगा कइयाँ रे,

मावड़ी, आंख्यां का आंसुड़ा मैया, थमेगा कइयाँ रे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।