जादू सो कर गए टोना सो कर गए

चित्र विचित्र
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बलि जाऊँ, बलि जाऊँ,

सदा इन नैनन की,

बलिहारी छँटा पे,

मैं होता रहूँ,

कभी भूलूँ नहीं याद,

तुम्हारे सखे,

चाहे जागत स्वप्न,

मैं सोता रहूं,

हरे कृष्ण ही कृष्ण,

पुकारा करूँ,

मुख आंसुओं से नित धोता रहूं,

बृजराज तुम्हारे वियोग में मैं,

बस यूँ ही निरंतर रोता रहूँ,

हे बृजराज, तुम्हारे वियोग में,

बस यूँ ही निरंतर रोता रहूं,

हे रि मेरे बाँके बिहारी के नैना सखी री,

कछु जादू सो कर गए रे,

जादू सो कर गए टोना सो कर गए,

जादू सो कर गए टोना सो कर गए,

मेरे बाँके बिहारी के नैना सखी री,

कछु जादू सो कर गए रे।

मेरे बाँके बिहारी के नैना सखी री,

कछु जादू सो कर गए रे।।

जादू सो कर गए टोना सो कर गए,

जादू सो कर गए टोना सो कर गए,

मेरे बाँके बिहारी के नैना सखी री,

कछु जादू सो कर गए रे।।

जाने कैसो कर गयो जादू,

जाने कैसो कर गयो जादू,

मेरा दिल मेरे रहो ना काबू,

दिन बीते कटे नहीं रैना,

सखी री कछु जादू सो कर गए री,

मेरे बाँके बिहारी के नैना,

सखी री, कछु जादू सो कर गए रे।

जादू सो कर गए टोना सो कर गए,

जादू सो कर गए टोना सो कर गए,

मेरे बाँके बिहारी के नैना सखी री,

कछु जादू सो कर गए रे......

मोटी मोटी अँखियाँ, बड़ी कजरारी,

बड़ी कजरारी बड़ी कजरारी,

गोल कपोलन के लट घुंघराली,

गोल कपोलन के लट घुँघराली,

ऐसो सुन्दर श्याम सलौना,

सखी री कछु जादू सो कर गए री,

मेरे बाँके बिहारी के नैना सखी री,

कछु जादू सो कर गए रे,

मेरे बाँके बिहारी के नैना,

सखी री, कछु जादू सो कर गए रे।

जादू सो कर गए टोना सो कर गए,

जादू सो कर गए टोना सो कर गए,

मेरे बाँके बिहारी के नैना सखी री,

कछु जादू सो कर गए रे......

नैना बिहारी जी के रस के प्याले,

रस के प्याले,रस के प्याले,

चित्र विचित्र पागल कर डारे,

पागल कर डारे पागल कर डारे,

देखे बिन चैन पड़े ना,

सखी री कछु जादू सो कर गए री,

मेरे बाँके बिहारी के नैना सखी री,

कछु जादू सो कर गए री,

मेरे बाँके बिहारी के नैना,

सखी री, कछु जादू सो कर गए रे।

जादू सो कर गए टोना सो कर गए,

जादू सो कर गए टोना सो कर गए,

मेरे बाँके बिहारी के नैना सखी री,

कछु जादू सो कर गए रे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।